*प्रेस विज्ञप्ति*
*डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच, नई दिल्ली*
*दिनांक: 23 अप्रैल 2026, गुरुवार*
*स्थान: होटल अशोक, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली*
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*विषय: “सेकुलरिज्म के नाम पर राष्ट्र की ढील नहीं चलेगी” – बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल का स्पष्ट उद्बोधन*
*नई दिल्ली:* डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, धर्ममूर्ति *बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल जी* ने आज होटल अशोक, चाणक्यपुरी में आयोजित बैठक में देश की आंतरिक सुरक्षा व कट्टरपंथ पर अत्यंत स्पष्ट व कठोर वक्तव्य दिया।
*बाबूजी का मुख्य उद्बोधन:*
_“दुनिया के किसी भी कोने में अगर कट्टरपंथ की आंच उठती है, तो उसका धुंआ भारत की सड़कों पर दिखाई देने लगता है। फ्रांस में कार्टून बने, स्वीडन में कुरान का अपमान हो, या म्यांमार में रोहिंग्या का मुद्दा हो—भारत के ‘सेकुलर’ ताने-बाने को ढाल बनाकर एक विशेष वर्ग यहां दंगे, आगजनी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर देता है। यह स्थिति भारतीय संप्रभुता को सीधी चुनौती है।”_
*भारत: कट्टरपंथ की ‘प्रयोगशाला’ क्यों?*
बाबूजी ने UAE के विदेश मंत्री *शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नहयान* के ऐतिहासिक कथन को उद्धृत किया:
_“कट्टरपंथ और आतंकवाद केवल उन देशों में पनपते हैं जो खुद को ‘अति-लोकतांत्रिक’ और ‘सेकुलर’ कहते हैं, क्योंकि वहां नियम ढीले होते हैं।”_
उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर एक वर्ग इसे _‘वियतनाम’_ बनाने की कोशिश करता है। जो लोग लंदन की किताब या इजरायल-गाजा युद्ध पर भारत की बसें जलाते हैं, वे उन्हीं इस्लामी देशों के कानूनों पर मौन साध लेते हैं जहाँ विरोध का अर्थ सीधे _मृत्युदंड_ होता है।
*खाड़ी देशों का ‘हंटर’ बनाम भारत की ‘ढील’*
बाबूजी ने उदाहरण दिया:
1. *सऊदी अरब:* किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रदर्शन प्रतिबंधित। कानून स्पष्ट है—देश की शांति पहले, मजहब बाद में।
2. *UAE:* _ज़ीरो टॉलरेंस_ नीति। मजहबी उन्माद फैलाने पर सीधा डिपोर्ट या जेल।
3. *बहरीन व कुवैत:* शिया-सुन्नी तनाव के बावजूद लोहे के हाथ से शासन। वहां _‘सर तन से जुदा’_ के नारे लगाने की हिम्मत नहीं।
*‘गंगा-जमुन’ पट्टी और चयनात्मक आक्रोश*
बाबूजी ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में दंगों का मुख्य कारण _‘चयनात्मक आक्रोश’_ है। चीन में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार पर मौन, लेकिन भारत में संविधान-प्रदत्त अधिकार को अराजकता में बदलना। फिलिस्तीन पर आंसू बहाने वाले यह नहीं पूछते कि मिस्र व जॉर्डन ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए बॉर्डर क्यों बंद किए हैं।
*आर्थिक व सामाजिक प्रभाव*
_“ये आयातित दंगे केवल कानून-व्यवस्था नहीं, आर्थिक प्रहार भी हैं। वैश्विक स्तर पर देश की छवि खराब होती है, निवेश प्रभावित होता है और आम नागरिक का टैक्स आग की भेंट चढ़ जाता है।”_
*आत्ममंथन की आवश्यकता*
बाबूजी ने स्पष्ट किया: _“सेकुलरिज्म का अर्थ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की छूट कतई नहीं हो सकता। जब तक मजहबी वफादारी राष्ट्र के प्रति वफादारी से ऊपर रहेगी, भारत की शांति विदेशी घटनाओं की बंधक बनी रहेगी। यदि सऊदी और UAE अपने मजहब के लोगों को अनुशासन में रख सकते हैं, तो भारत को अपनी उदारता को कमजोरी क्यों बनने देना चाहिए?”_
*निष्कर्ष:*
_“तथ्य स्पष्ट है: कट्टरपंथ वहां नहीं पनपता जहां मजहब की कट्टरता हो, बल्कि वहां पनपता है जहां व्यवस्था कमजोर और ‘सेकुलरिज्म’ के नाम पर डरी हुई हो।”_
*जय सनातन धर्म | जय भारत | राष्ट्र प्रथम*
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*प्रेषक:*
*कार्यालय सचिव*
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच
*केंद्रीय कार्यालय:* रोहिणी दिल्ली 110085
*संपर्क:* 9414402558 | *ईमेल:* dspmrvm@gmail.com | *वेबसाइट:* http://www.dspmrvm.com
*– बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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